मन हमारा अभिमान में रहता है ,

मन हमारा अभिमान में रहता है ,
तन दिखावे के लिए सम्मान में रहता है ,

डोर सांसों की एक दिन टूटनी ही है .
कब तक पतंग आसमान में रहता है ,

मेरे देश की हालत मत पूंछ ऐ दोस्त ,
१०४ डिग्री से अधिक तापमान में रहता है ,

थक हार के फिर जहाज पे लौट आएगा,
मन का पक्षी कब तक उड़ान में रहता है ,

खुदा की रहमत तभी तक रहती है ,
जब तक इंसानियत इंसान में रहता है .

घर परिवार और रिश्तों की बात मत कर
अब तो आँगन में दीवार हर खानदान में रहता है.

 

 

 

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