ऐसा भी क्या माँग लिया था???

वो आँखें……..

कितना कुछ सुना गईं ….

 

कितने तंज़

कितनी रंजिशें

कितनी मिन्नतें

कितनी मन्नतें

एक अधूरा ख़्वाब

एक पूरा इंतज़ार

एक ढलती रात

एक डूबता दिन

 

तैरते काजल पे हिचकोले खाते डोरे लाल

पलकों के कोनों में बिछे उलझनों के जाल

अनजाने शब्दों से बनी एक अलबेली भाषा

समझ ना आने पर भी मन पढ़ने को उकसाता

अथाह तले तक ले जाती वो नीली-सफ़ेद झील

पार पाने की हर कोशिश नाकाम करती मासूम दलील….

 

मांगती बार बार बस एक ही जवाब

दोहराती बार बार बस एक ही सवाल….

 

ऐसा भी क्या माँग लिया था???

वो आँखें २

 

 

3 Comments

  1. Dr Jai 20/09/2013
    • Anju Varma Anju Varma 21/09/2013
  2. आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 'आलेख' 29/09/2015

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