अतुल्य भारत को तुल्य रहने दो

इंसानियत इन्सान से दूर क्यों होती है,
सबको सुख देने वाली माँ ही क्यों रोती है,
कहाँ गये वो झलावे कल के,
जब लोग कहा करते थे की सीपी में मोती है।।

सीपी में मोती जैसा देश हमारा,
हर संस्कृति से घिरा वेश हमारा,
फिर भी क्यों दुनिया आज भी हैवान है,
खुद के दुःख से नहीं दुसरो के सुख से परेशान है।।

आशाराम जी जैसे लोग हैं यहाँ पे,
सच्चाई कम ज्यादा ढोंग है यहाँ पे,
हर दिन एक नया सवेरा तो होता है,
और फिर किसी नए कांड का बसेरा होता है।।

दामिनी कांड को तो सब जानते हैं,
इस नाईंसाफी को सब मानते हैं,
फिर क्यों उन जुर्मियों को शह दे रखी है,
या इंसानियत ही पानी की तरह बह रखी है।।

निकाल फेको इन गुनहगारों को देश से,
दूर कर दो इन्हें भारतीय वेश से,
संस्कृति का ये नाम डुबायेन्गे,
और फिर खुद को भारतीय बुलायेंगे।।

अतुल्य भारत को अतुल्य रहने दो,
थोड़ा तो इसका मूल्य रहने दो,
सर उठा सके किसी और देश के सामने,
इतना तो इसको तुल्य रहने दो।।

4 Comments

  1. upma 17/09/2013
  2. rahul singh 12/10/2013
  3. rohit 14/10/2014
  4. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 24/11/2014

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