माँ

कभी माँ का श्रिंगार थी ये चूड़िया

उसके आने की आहट उसकी मुस्कराहट थी ये चूड़िया

पर आज माँ के करुड़ रुदन पर टूटकर बिखरी है ये ऐसे

मानों माँ का अस्तित्व दुनदती हो ये चूड़िया

माँ है पर अब श्रिंगार नहीं है

वो मुस्कराहट वो खवाब नहीं है

तेरी  आहट तेरी मुस्कराहट तेरा श्रिंगार सब ले गयी ये चूड़िया

माँ तेरी इन भीगी पलकों में आज भी दिखती है मुझे ये चूड़िया

 

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