गजल

 दीदार हुई एक खुशनुमा से और हम हैरान हो गए
दिल चुराने की ख्वाहिस से हम भी बेइमान हो गए
मरने की दशहत न थी कोई अकेले इस आवारिगी से
मकसद बनके जब आई वो जीना अब आसान हो गए
हुश्न की मल्लिका थी वो हम भी थे उनकी गुलाम से
शहंशाह जैसी फितरत हमारी अब उनके दरवान हो गए
हुकूमत सारी छोड आए मोहब्बत की ऐसी अंजाम से
हुकुम बजाता हु अब उनकी हम जैसे नादान हो गए
मोहब्बत जो खरीदकर लाए बिकती थी कही बाजार से
उड गई चिडिया चुग के दाने मुफ्त मे हम बदनाम हो गए
हरि पौडेल

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