न दर्द हुवा तो इश्क क्या

न बेकरारी न इन्तजार हुवा तो इश्क क्या

न आँशु बही न दर्द हुवा तो इश्क क्या
न बर्षात हुइ न चाँद उगा तो इश्क क्या
वो तनहाई जो दिल मे न चुभा तो इश्क क्या
न रुस्वाई न सुलह हुवा तो इश्क क्या
न हुइ जुदाई न दिल तडपा तो इस्क क्या
न नजरें चुराइ न करार आया तो इश्क क्या
न चुडियाँ टुटी न पायल बजी तो इश्क क्या
न जाम टुटी न कहर हुवा तो इश्क क्या
न शाम ढली न शहर हुवा तो इस्क क्या
न बेकरारी न इन्तजार हुवा तो इश्क क्या

न आँशु बही न दर्द हुवा तो इश्क क्या
हरि पौडेल

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