शायरी

किरकिरी आँख की सही नहीं जाती,
भीड़ में तनहाई हाय सही नहीं जाती,
रोज सोचूँ एक बात आज कहनी है उनसे,
मगर वही एक बात लब से कही नहीं जाती.
:- सुहानता ‘शिकन’

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