मेघ -बरस -बरस रसधार बरस घन !

मेघ -बरस -बरस रसधार बरस घन !

घूम -घूम संसार घूम उपवन बन !!

चंचल मन का आलस्य चपल जन !

विकल रागिनी पवन घोर सघन घन !!

रोम -रोम आनन्द अङ्कुरित घिरा घन !

रिमझिम -रिमझिम नूपुर सा छन -छन !!

जगती तलपर दावानल दहता थम -थम !

लहरों के घूघट से छप छप झरता घन !

सरावोर अमृत रस बरसत मधुमय जन !

मघुर पवन पुरवईसुख मय हो जीवन !!

 

 

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