संघर्ष

सूरज की पहली लाली जब इस धरती पर आती है

कहती है उठो शुरुआत हुई संघर्ष की अभी जो बाकी है

हर दिन हर पल हर कण हर छन

संघर्ष भरा है जीवन में

मन को तन को जो सुद्रण करे , एक रस पहुचाये जीवन में

कोई करता संघर्ष जगत में हर भौतिक सुख पाने को

तो कोई करता संघर्ष मात्र इस पेट की भूख मिटाने को

इस स्रष्टि में संघर्ष बिना हो सकता है कुछ काम नहीं

पशु पक्षी मानुष इसीलिए तो करते है विश्राम  नहीं

संघर्ष एक पथदर्शक है जो राह सही दिखलाता है

संघर्ष भरे इस जीवन में संघर्ष ही विजयी बनता है

5 Comments

  1. yashodadigvijay4 12/09/2013
    • Aarti Shukla 25/09/2013
  2. poem 28/10/2013
    • Aarti Shukla 07/11/2013
  3. Rinki Raut Rinki Raut 08/11/2013

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