चंद शेर.. !!

ये ज़रूरी नहीं कि तू वो ही कहे जो मुझे पसंद हो,
ज़रूरी है कि तू वो ना कहे जो मुझे नापसंद हो !!

लोग कहते हैं,,,,, ”सच्ची मोहब्बत सिर्फ एक बार होती है……”
पर मेरा ख्याल है, अगर मोहब्बत सच्ची हो तो बार-बार होती है..!!

अदा दिल को सताने की, हसीनों से कोई सीखे;
वो देकर ज़ख्म दिल को,पूछती हैं हाल कैसा है !

उजाला इस क़दर फैला यहाँ तेरी मोहब्बत का,
कि तेरा चाँद तेरी रौशनी में आज ही ग़ुम है !!

मै तुझे सोचा था जो समझा था,,वो पाया नहीं
दोस्ती के मायने अब तक तुझे आया नहीं !!

न जाने आज का दिन क्या नयी सौगात लाया है,
कि मेरा यार मेरे पास अरसे बाद आया है !!

तुझे आगाह करता हूँ कि उससे इश्क न फरमा,
वगरना बेवफाई कर वो इक दिन भूल जाएगी !!

शिक़ायत हर कोई सुनता यहाँ ख़ामोश होठों की,
मगर हँसता हुआ चेहरा यहाँ कोई नहीं पढता !

मैं ये नहीं कहता कि औरों के घरों में दिए जलाओ,
बस ये इल्तजा है कि किसी के घर का दिया न बुझे !!

फ़रिश्ते ने कहा कि साथ चल ज़न्नत दिलाता हूँ,
ख़बर उसको नहीं कि गाँव ये ज़न्नत से बढ़ कर है !!

चलो कुछ तो हुआ उनपर असर मेरी भी बातों का,
यहाँ पर कौन किसकी बातों की परवाह करता है !

न जाने क्यूँ मुझे उनकी यही एक बात भाती है,
वो सब कुछ जानकर भी मुझसे ही अनजान बनते हैं !!

तेरी बज़्म में जो मैं दाखिल हुआ उठी थी निगाहें कई मेरी ओर,
मैं हैरान था कुछ परेशान भी क्यूँ तेरी नज़र है नहीं मेरी ओर !!

ग़ैरों से लड़ते-लड़ते जीती है जंगें हमने,
खाकर शिक़स्त बैठे अपनों के वार से !

पाकर दीदार उनका,तबियत सुधर गई
अच्छा भला था मैं,मेरी आदत बिगड़ गई !

अजब फितरत है चंद लोगों की,जागते-जागते भी सोते हैं
ऐसे कुछ शख़्स और भी हैं यहाँ,हँसते-हँसते भी दिल में रोते हैं !!

सूर्य बादलों में छिपा है,तुम कहते हो अँधेरा हुआ है
हर तरफ रौशनी बिखरी पड़ी है,तुम कहते हो सवेरा हुआ है !!!

अगर होता पता कि वो रखा रुमाल तेरा है,
क़सम तेरी कि उसको छूने से परहेज़ मैं करता !

कितनी भी कोशिश कर लूँ अब मेरी तस्वीर अच्छी नहीं आती,
बस संभाल रखा हूँ इक पुरानी सी

बड़ी ख़ामोशियों से जब सभी की बात सुनता हूँ,
जमाना ये समझता है की गूंगा हो गया हूँ मैं !

ग़म को सीने में छुपाकर कब तलक रखूं,
मेरी आँखों के आँसू बेवफ़ाई पर उतर आये !

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