मुहब्बत मिट नहीं सकती …………।

मुहब्बत मिट नहीं सकती …………।

मुहब्बत अमर कहानी है, मुहब्बत मिट नहीं सकती।।

मेरे दिल में – बसी हो तुम, तेरे दिल में – बसा हूँ मैं
तडफता मैं – अकेले में, तड़फती तुम – अकेले में
तेरी मंजिल – है मुझ से, मेरा मुकाम-है तुम पर
जमाने के – हटकने से, मुहब्बत टल नही सकती ……

मेरा हर ख़्वाब तेरा है, तेरा हर ख़्वाब – है मुझ से
ना खुद को रोक पाती तुम, ना खुद को रोक पाया मैं
तेरी हर साँस मुझ से है: मेरी हर आस है तुम पर
जमाने से – डर कर के, मुहब्बत रुक नहीं सकती …….

तुम्हारा साथ है पथ में, तो मंजिल दूर नहीं लगती
तुम्हारा प्यार है दिल में, तो साँसे थम नहीं सकती
मुझे विश्वास तुम पर है, तुझे विश्वास है मुझ पर
जमाने के – बवन्डर से, मुहब्बत हिल नहीं सकती ……

सफर पर चल पड़ा था मैं, निभाया साथ तुमने भी
कसम खायी थी मेने भी, किया वादा है तुमने भी
मेरी तक़दीर तुम पर है, तेरी तजबीज है मुझ पर
ज़माने के बदलने से, मुहब्बत बदल नहीं सकती ……

मेरे रँग में – रँगी हो तुम, तेरे रँग में – रँगा हूँ मैं
मेरे बिन- तुम अधूरी हो, तेरे बिन- मैं अधुरा हूँ
तेरी धडकन -है मुझ से ,मेरी धडकन- है तुझ पर
जमाने के- कड़कने से, मुहब्बत मिट नहीं सकती ……

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