उन्मुक्त शेर

१)
आया था खुदा खुद सुनके मेरी अरजी ,
और हमने लौटा दिया उसे कहके जैसी तेरी मरजी !!

२)
तपती दुपहरी मे छांव है प्यार,
सच कहें हम पर जो बरसा वो कहर है प्यार !!

३)
अपनी जान माना था उन्हें,
क्या पता था हमरिइ जान ही लेने का इराद था उन्हें !!

४)
हौंसला न टूटे कभी तो अच्छा हो,
सफर हंस के बीते चाहे तन्हा हो !!

५)
मोहब्बत के हर अन्दाज से हम नफरत करते हैं,
अब तो ये आलम है कि अपनी भलाई करने वालो पर भी हम शक करते है !!

4 Comments

  1. Gurcharan Mehta 'RAJAT' Gurcharan Mehta 09/09/2013
    • Muskaan 09/09/2013
  2. yashodadigvijay4 10/09/2013
    • Muskaan 11/09/2013

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