पहचान

या तो वह
बहुत पास था
या बहुत दूर
और
ये दोनों
वहाँ नहीं थे
जहाँ मैं थी ।

मानों
मैं एक अन्तराय थी
एक ‘बीच’-
एक परिचय
उसके निकटतम होने का
उसकी दूरस्थता का

मानों
मैं एक पहचान थी
इन दोनों के बीच फैली हुई ।

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