पक्षिओं का मेला

आओ देखें पक्षिओं  का  मेला है,

छोटे बड़े रंग- बिरंगे पंखों का मेला है.

कांव-कांव करता कौआ आया सब का दादा,

पहन कर कोट काला बातें करे ज्यादा,

एक आँख से काना समझे बड़ा सयाना ,

लोमड़ी को देख कर भूल जाय रोटी खाना ,

चूं-चूं करती चिड़िया आयी सब की नानी,

मटकती -मटकती ओड़ चुनरिया धानी ,

इधर -उधर फुदकती रहती बनती बड़ी सयानी ,

खिचड़ी पका कर खा जाती फिर चिल्लाती रानी,

गुटर-गूं करता कबूतर आया बिना पूछं वाला,

पगड़ी सिर पर  बाँध कर कबूतरी साथ लाया,

बना घोंसला खिड़की पर बच्चों के संग आया,

बिल्ली को देख कर आँखों को दबाया ,

कवैक-कवैक करती आयी बतख दूर से शोर मचाती ,

पीली चोंच लाल पैर कीड़े खाती तैरती इठलाती ,

छोड़ कहीं न अपने बच्चे पीछे है भगाती,

मैं भी नाचूं मैं भी गाऊँ पहला नंबर है पाती,

ऊँचे-ऊँचे राजहंस चलते-चलते झुंडों  में आये ,

उड़ते-उड़ते सारस सफ़ेद रंगों में छाए,

ताज पहन कर मुर्गा बैठा तोते ने बजाया बाजा,

मछली चबाता बगुला आया ,मोर ने नाच नचाया ,

बड़ी बातूनी मैना आयी ,कोयल ने मीठी तान सुनाई ,

चिक-चिक चीक तीतर बटेर का कहना ,

दोनों लड़े आपस में सब को खूब सताना ,

कर दिया हंगामा खूब शोर मचाया,

कठफोड़वे ने चोंच मार कर सब को दौडाया ,

क्या हुआ क्या हुआ कोई समझ ना पाया,

कहाँ जाएँ सब का मन घबराया,

सब बोलें अपनी बोली इतना हो गया शोर ,

ख़तम हो गया मेला सब दौड़े घर की ओर.

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