क्या चाहते हो

कितना है सब्र हमारे अन्दर आज भी,
क्या तुम हमें आजमाना चाहते हो ?
कभी याद आना कभी भूल जाना,
तुम हमें क्या जताना चाहते हो ?

खा लेंगे तुम्हारी खातिर झूठी सच्ची,
तुम जो कसमें खिलाना चाहते हो I
मोड़ लूँ मै दिल तुमसे, जो तुम कहो,
क्यूँ तुम हम पर हक जमाना चाहते हो ?

कभी छोटी छोटी बाते दिल से लगाना,
तुम हमें क्या याद कराना चाहते हो ?
और कभी बड़ी बड़ी बातें भी दरकिनार,
तुम भला क्या दिखाना चाहते हो ?

कभी तोड़ देते हो दिल बस ऐसे ही,
ओर कभी कोई वादा निभाना चाहते हो I
हमारा हक भी छीना है तुमने बस यूँ ही,
और आज सारे कर्जे चुकाना चाहते हो II

साथ दिया सदा तुम्हारा अच्छे कामो में,
तो गुनाहों में भी साथी बनाना चाहते हो I
भूले नहीं अभी भी तुम वो बातें सभी,
ज़ख्म कुरेदना कोई पुराना चाहते हो II

माना दुश्मनों को हरा देते हो तुम पल में,
पर क्या दोस्तों को भी दबाना चाहते हो ?
बता दो दिल की सब, मिल जायेगी माफी,
जो भी है राज़ जो भी बताना चाहते हो II

आँसुओं का समंदर मिला है तुमसे ही,
कमाल है,आज अश्कों को पी जाना चाहते हो I
तुम, तुम नहीं कोई गैर हो, अब समझा,
जो झूठ को सच में बदलवाना चाहते हो II
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गुरचरन मेह्ता 

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