खौफ तो लोग यूँ ही खाते हैं

आसां तो जिन्दगी भी नहीं फिर भी,
मौत से खौफ तो लोग यूँ ही खाते हैं I

प्यार में नागवार गुजरी तुझे हर बात हमारी,
बेवफाई से खौफ तो लोग यूँ ही खाते हैं I

जानते हैं इश्क है खता फिर भी कौन रुका,
बदनामियों से खौफ तो लोग यूँ ही खाते हैं I

कौन निभाता है वादा किया हुआ फिर भी,
कसमों से खौफ तो लोग यूँ ही खाते हैं I

वक़्त के साथ बदलना है इंसानी फितरत,
बदलने से खौफ तो लोग यूँ ही खाते हैं I

घर की दीवारें भी तो जिन्दगी भर साथ देतीं हैं,
अकेले रहने से खौफ तो लोग यूँ ही खाते हैं I

उजालों ने भी किसी की कब संवारी है जिन्दगी,
अंधेरों से खौफ तो लोग यूँ ही खाते हैं I

तोड़ते थे, तोड़ते आये हैं सपने सदा अपने,
बेगानों से खौफ तो लोग यूँ ही खाते हैं I

चाँद सिक्कों में बिक जाती है यहाँ आत्मा,
साए से खौफ तो लोग यूँ ही खाते हैं I

जवाब अगर मिल भी जाए तो भी उलझन नहीं सुलझती,
सवालों से खौफ तो लोग यूँ ही खाते हैं I

झूठ की बुनियाद तो मजबूत नहीं “मुस्कान”
सच्चाई से खौफ तो लोग यूँ ही खाते हैं II
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रचियता – मुस्कान

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