कौन करेगा खाद्य सुरक्षा योजना की सुरक्षा

वैसे तो संसद में होते ही रहते हैं आए दिन कोई न कोई बिल पास ,

पर यह वाला बिल है आम जनता के लिए खास ,

सरकार ने कर दिया food security बिल संसद मे पास ,

82 करोड़ गरीबों की बंध गई है अब आस,

कोई भी गरीब नहीं मरेगा अब भूखा ,

66 साल बाद सरकार लाई है एक कानून अनोखा  ।

 

BPL के लोगो को हो रहा है अब यह अंदाज,

सस्ते दामो पर मुहय्या होगा अब उनको अनाज ,

कैसी शुभ  घड़ी आई है आज ,

नौ नौ आँसू नहीं रुलाएगा अब प्याज,

सरकार की नजरों मे  हुआ है  बड़ा ही नेक काम ,

दूर गामी होंगे इसके परिणाम ।

 

विपक्ष ने कहा सरकार को गरीबों की नहीं, vote बैंक की है चिंता ,

पर यह भी सच है की , सबने लुभावने वादे कर के ही चुनाव है जीता ,

आजादी के 66 सालों बाद सरकार ने ली है गरीबों की सुध ,

सभी political parties ने पास कराया यह बिल खुद।

कितने शर्म की है यह बात ,

आज भी भूख से जूझते है कुछ गरीब दिन रात ,

कानून तो बन गया , लेकिन कैसे होगा इसका implementation,

हर महकमे में तो है यहाँ corruption,

सरकारी गोदामो में सड़ रहा है आज भी अनाज ,

चाहे वो गेहूं , चावल हो , या हो फिर प्याज ।

 

देश की पहली समस्या है भ्रस्टाचार,

जिसके रहते नहीं हो सकता कभी बेड़ा पार ,

दूसरी समस्या है काम मे लापरवाही ,

जिसके चलते सुचारु नहीं हो सकती अनाज की आवाजाही,

गोदाम से लेकर ट्रांसपोर्ट तक , होगा गैर जिम्मेदारी का खेल,

भ्रस्ट लोग कर देंगे सरकार की मंशा को फ़ेल ।

 

Inefficiency के लिए हो कड़े से कडा punishment,

तभी तो successful हो पाएगी government.

सरकारी खजाने पर पड़ेगा इसका बहुत बड़ा burden,

सब पर tax की मार पड़ेगी देखना all of sudden ,

अगर अधिकारियों ने ठीक से नहीं की अपनी duty,

तो इतना सब कुछ झेलने के बाद भी नहीं मिलेगी  food security.

 

कोई भी सरकारी स्कीम का फल क्या गरीबों को है मिला ,

Mid day meal में ही देखो कितनी बार आटा हुआ गीला,

कितने ही बार स्कूल के बच्चे पड़े है बीमार ,

रोज पढ़ते होंगे आप भी अखबार ,

कोई भी सरकारी योजना कर नहीं पाती है गरीबों का उद्धार,

क्योंकि घुस जाता है उसमे लालच और भ्रस्टाचार   ।

 

फूड security योजना का भी होगा वही अंजाम ,

अगर पुख्ता नहीं किए इसको चलाने के इंतजाम ,

देखने में तो बड़े ही मोहक लगते है सरकारी बिल के वादे ,

पर पूरा रास्ता तय नहीं कर पाते, टूट जाते है इनके इरादे ,

कोई ऐसा तरीका तलाशो , जो इस रेल को पटरी पर ला दे,

वरना तो ये स्कीम भ्रस्टों के हाथ में,  सारा  खजाना ही खाली करा दे ।

जब चारों ओर ताक लगाए बैठे हो सरकारी पैसे पर भक्षक ,

कैसे मिल पाएगा इनके लिए कोई  ईमानदार  रक्षक ?

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