तुम मेरी जान हो

सुबह सुबह तुम जागती हो,
धीरे से मेरे बगल से सरक कर
पहनकर चप्पल
किचन में जाती हो
और
पतीला चडाकर
मीठी मीठी चाय बनाती हो
फिर आती हो, बेडरुम मे
धीरे से मुझे सहलाते हुए
जगाते हुए
कहती हो
सुनो जी, चाय तैयार है
इसीलिए तो कहता हूँ
तुम मेरी जान हो
बच्चों को तैयार कर के
स्कुल पहुंचाती
मै काम को तैयार होता
मुझे नाश्ता के लिए
सैंडविच बनाती
दे के चुम्मी बाई बाई कर के
घर के काम मे फिर जुट्जाती
इसीलिए तो कहता हूँ
तुम मेरी जान हो
हरि पौडेल

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