कलयुगी परिवेश

कलयुगी परिवेश

अपना विशाल भारत तो था कभी साधु और संतो का देश ,
दुर्भाग्यवश आजकल तो दुष्टों का हो गया है इस जमात में प्रवेश ।
पहले सज्जनों के सानिध्य में इज्ज़त न कभी किसी की लूटी जाती थी ,
इसीलिए तो स्त्रियाँ, आस्था से संतों के आगे अपना शीश झुकाती थी।

अरे, रावण जैसे मतिभ्रस्ट ने भी नहीं लगाया था सीता जी को कभी हाथ ,
दूर से ही करता था जब भी करनी होती थी कोई बात ,
भले ही किया था सीता जी का उसने हरण ,पर उसके भी थे कुछ सिद्धान्त,
अशोक वाटिका में provide कराया था उसने सीता जी को एकांत ।

अकबर ने भी भले ही पा लिया था जोधा को अपनी ताकत से ,
पर छुआ तक नहीं उसे बिना उसकी इजाजत से ,
जिस देश का रहा हो ऐसा इतिहास ,
उस देश में कहाँ से आ गए कुछ व्यभिचारी लेकर अंधविश्वास ।

पहले लोग करते थे साधु संतो पर बड़ा नाज ,
Trust ही मिट गया है कुछ छल कपटीयों की वजह से आज,
जिधर देखो कपटी घूम रहे , दिखाते फिरते सत्य का path,
Safe नहीं रह सकी वो अबला, भले ही माता पिता के थी वो साथ।

ऐसे ढोंगी लोगों ने तो कर दिया है देश को बदनाम,
और जब भी लगता है इनपर कोई इल्जाम ,
गहरी साजिश का दे देते है ये उसको नाम ,
डराते है victim को यह कहकर की , भुगतने होंगे परिणाम ।

देश में अभी भी है , कुछ वास्तविक संत और ज्ञानी ,
इन बेईमानों की भीड़ में उन बेचारों की भी होगी बदनामी,
टीवी channels को चाहिए न करे ढोंगियों के उपदेश broadcast,
नहीं तो इनकी हिम्मत ऐसे बढ़ रही है जैसे हो कोई ट्रेन superfast,
इनकी popularity अब नहीं करेगी और ज्यादा last,
क्यूंकी इनकी हरकतों से public हो गयी है अब aghast.

एक जमाना था जब माँ सीता भी रही थी महर्षि वाल्मीकि के आश्रम ,
लव , कुश को वहीं जन्म दिया , किया खूब परिश्रम,
आज कल तो पाखंडियों ने भी है बना लिए अपने कुटिल ठिकाने ,
ऊपर बैठे देवता गण भी लगे है इनकी ओच्छी हरकतों पर शर्माने ,
विश्वामित्र , वशिष्ठ जैसे संतों का था यह अपना महान देश ,
इन ठगों ने कर दिया बदनाम, धर कर पारंपरिक साधु का वेश ।

जो कुछ थोड़े बहुते चेले चपाटे अभी भी लगे है इनके साथ ,
उनको विनती है की थोड़े ज्ञान तन्तु खोलें अपने, और छोड़ दे इन का साथ ,
कुछ नहीं मिलने वाला है सिवाए कराने के अपना exploitation,
इन सब ढोंगियों के विरुद तो चलने वाला है litigation.
भगवान तो सबके अंदर ही बसा है ,इन ढोंगियों के न काटो चक्कर ,
अक्ल ठिकाने आ जाएगी इन सबकी , गली गली फिरेंगे बन के घन चक्कर ।

भारतीय समाज को चाहिए बनाए एक code of conduct,
बहिष्कार करे उसका , करे जो भी misconduct,
भारत ने तो achieve की है spiritual पराकास्ठा,
धर्म कर्म से तो जुड़ी है हम सभी की आस्था ,
आजकल तो धर्म पर कब्जा करने की लगी है होड ,
ढोंगी आगे बढ़ रहे है , संतो, ज्ञानियों को पीछे छोड़ ।

अपना विशाल भारत तो था कभी साधु और संतो का देश ,
दुर्भाग्यवश आजकल तो दुष्टों का हो गया है इस जमात में प्रवेश ।

 

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  1. Nitin 04/09/2013

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