शायरी

सैलाब है तमन्ना की इस दिल में आजकल,
बिखरी उनकी अदाएँ जो महफ़िल में आजकल,
अपनी ही सूरत पहचानने से धोखा खा जाता बार बार,
शायद मुझी में है कहीं मेरा कातिल आजकल.
                           :-सुहानता ‘शिकन’

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