भूल जाये और मस्त रहे

भूल जाये और मस्त रहे

एक तरफ
प्याज, टमाटर, तेल के दाम आसमान छूने को बेताब हैं
महँगाई दिन दुनी रात चौगनी रफ़्तार से दौड़ रही है
देश की मुद्रा को
तीनों धुरंधर अर्थशास्त्री उसके हाल पर छोड़ कर बेबस बन गए हैं
प्रधानमंत्री , वित्त मंत्री , मोंटेकसिंह आहलुवालिया को
रुपए की गिरावट थामने का कोई कारगर उपाय नहीं सूझ रहा
अब मुद्रा बाजार से लेकर शेयर बाजार और सोने-चांदी के बाजार पर सटोरिए हावी हो गए हैं
सारी हदें पार हो गईं
जब अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया गोता लगा कर
अब तक के अपने इतिहास के सबसे निचले स्तर तक गिर गया
वित्त मंत्री अभी भी देश के लोगों को धीरज रखने की ही सलाह दे रहे हैं
हताश तेवर के साथ देश को फिर आश्वासन की घुट्टी पिला दी
उधर व्यापार जगत हैरत में है
कि सरकार कुछ ठोस उपाय क्यों नहीं कर रही
विदेशी मुद्रा की आमद बढ़ाने के लिए किए गए उसके जतन बेकार गए हैं
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश तो हो ही नहीं रहा
शेयर बाजार में लगे अपने डॉलरों को भी विदेशी निवेशक धड़ल्ले से निकाल रहे हैं
नतीजा सामने है
शेयर बाजार की इस बेचैनी की वजह भी डॉलर के मुकाबले रुपए की गिरावट न थम पाना ही है।
शेयर बाजार में तो सट्टा होता ही था
अब अनाज, चीनी और जरूरत की दूसरी चीजों के अलावा
सोना-चांदी ही नहीं डॉलरों का भी वायदा कारोबार चलता है
लेकिन हैरत है कि सरकार इस वायदा कारोबार पर पाबंदी लगाने को तैयार नहीं
उधर सोने के आयात पर
सीमा शुल्क बढ़ाया तो इसकी तस्करी तेज हो गई है
अंतरराष्ट्रीय कीमतों के मुकाबले घरेलू बाजार में
सोने और चांदी के दाम भी लगातार उछाल ले रहे हैं
आम जनता इन सबसे बेखबर
दो जून की रोटी जुटाने में ब्यस्त है
और सरकार जनता को भरोसा दिला रही है कि
बह भूल जाये
दामिनी कौन थी
निर्भया फंड का क्या हुआ
गुड़िया कौन थी
राबर्ट बढेरा मामला को
टू जी थ्री जी सब बकबास था
कोयला घोटला हुआ ही नहीं
आदर्श तरीके से शासन चल रहा था
लोकपाल ,जनपाल लोकपाल , कालाधन आन्दोलन
जनता को बरगलाने के लिए थे
सर्बोच्च अदालत के फैसले
बिधायिका के कार्य में हस्तछेप थे
और
खाध सुरक्षा बिल को याद कर
मस्त रहे

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