हाय अब इस जमाने को ये क्या हुआ ?

हाय अब इस जमाने को ये क्या हुआ ?

वो हैं हुस्न की परी दिमाग से भी खरी |
मुस्कराहट तो उनकी जैसे हो फुलझरी ||
नजर की नजाकत भी क्या खास है |
चेहरे पे ख़ुदा की है जादूगरी ||

हाय जादू दिल पे चलाया तो ये क्या हुआ ?

उनमे सजावट न थी हममें दिखावट न थी |
गम की आहट न थी मोहब्बत मिलावट न थी ||
उनकी अदा थी अजब अपनी वफ़ा थी गजब |
उनको चाहत भी थी हमको राहत भी थी ||

हाय मजाक-ए-शरारत से ये क्या हुआ ?

वो तालीम में पले शोहरत में थे ढले |
दौलत में जा मिले हमसे कर दिए गिले ||
बात की बात की बात थी बात बनती कभी |
इन्तजार हम करें या वो थे दिलजले ||

हाय ख़्वाब झूठा दिखाया तो ये क्या हुआ ?

दिल से दिल थे मिले या थे वारिश बुलबुले |
फूल दिल के खिले या गुल दिल में जले ||
नजर को नजर दी या नजर मार दी |
वो बेदर्द हाकिम थे जालिमो से थे मिले ||

हाय दिल को रुलाया तो या क्या हुआ ?

One Response

  1. mukesh bajpai 06/10/2013

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