परीक्षा

न हों चैन न कभी आराम

नही लेते पढने से विराम

एक ही ध्यान हर पल रहता

है उसी का नाम परीक्षा

पढने के पीछे सब पड़ते

पढो पढो कहते ही रहते

पढने की होती नही इच्छा

देनी तो होगी परीक्षा

सबको आगे ही है बढना

पर सबको इतना है कहना

होती है क्या ऐसी शिक्षा

देनी तो होगी परीक्षा

आश लगी रहती है माँ की

पढने की भी बोझ है काफी

शिक्षक भी करते हैं समीक्षा

देनी तो होगी परीक्षा .

 

Leave a Reply