हमारी भी कटती नही

हमारी भी कटती नही ये रात तुझे बताउ कैसे
अब तो पकड ले मेरी हाथ तुझे सम्झाउ कैसे

दुनिया वालो के सामने मत कर तुँ मुझे बदनाम
दिक्कत हि दिक्कत है छुप छुप के मै आउँ कैसे

दिन निकलती नही और अब रात सम्हलती नही
सारे शहर है यहाँ पहरेदार तुझे मै बुलाउ कैसे

छुप छुप मिलना अब छोडो जल्द बारात ले आओ
दिल धडकता है बहोत तुझे मै ये सुनाउँ कैसे

तुम्ही मेरे तकदिर हो सुख दुख के साथी भी तुम
छोड के तेरे आङन दुसरे कि घर सजाउँ मै कैसे

हरि पौडेल

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