रक्षाबंधन

राखी का त्योहार मनोहर

अंतर्मन को भाए छूकर

हर पीड़ा हर कष्ट से ऊपर

पर्व मनाये मन से भरकर

सावन का सुन्दर ये पूनम

भाई-बहन का पावन पूजन

चिर –स्नेहिल रक्षा का बधन

शुभ संकल्प भरा संरक्षण

कच्चे धागे से बांध कलाई

प्रेम निभाते बहन और भाई

उत्साह उमंग समस्त स्नेह

जागृत करता ह्रदय में नेह

मानव मूल्य को करे उजागर

बैर भाव को परे भुलाक

उल्लास भरे जीवन में बेहतर 

ये प्राचीन गौरवमय अवसर

प्रेम की धारा बहा करेगी

त्याग-भावना सदा रहेगी

ये बंधन रक्षा की होगी

जन –जन की सुरक्षा होगी.

भारती दास

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