छन्द प्रसव

पल ने पैर किया जब भारी

बोझिल-बोझिल काया प्यारी

गुंथन-मंथन अति असमंजस्कारी

उलझन में ही सुलझन सारी

पाया अथ-अभिदान उजास

हुई सहज नवनीत आस

सुन सकल छन्द आहट

पाई पावन-प्रसव राहत

अब व्याकुल मनसा नारी

सहज प्रफुल्ल अति भारी

सहकर सतत दुर्वह पीड़ा

पाती अक्षय -आनंद क्रीड़ा ।

 

 

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