शून्य

जिजीविषा, संसृति

साधन, सुविधा, समृद्धि

जीवन आस

प्राप्ति, प्रयास

सब माया, शून्य

सिर्फ शून्य

जो हुई मेहर

छूटी शिफ़र

हुआ कारज नेक

पाया एक

अब शून्य, शून्य नाहीं

हुआ गुणक दहाई

बना दस, सौ, हजार

हजार के कई हजार ।

 

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