घर में बेटियाँ

चहकती चिरैया, कूकती कोयल,
मृग छौने सी कूदती-कुलाँचती
घर की नींव, आँगन का बिरवा,
खेलती, खिलखिलाहट आँजती
महकती- मुस्कुराती
सहज-संजीवनी हैं – घर में बेटियाँ ।

माँ का हाथ, बाप का चश्मा
दादी की दवा, दादा की माला
भैया का खेल, दीदी की गुडि़या
सबका ख़्याल, घर का उजाला

अबला हों या सबला
पर सुदृढ़ रीढ़ हैं – घर में बेटियाँ ।

दीवाली का दीप, होली की गुलाल
सावन में राखी, झूला, मलहार
पूजा का थाल, हाथों की मेंहदी
नूपुर, नृत्य, गीत, मंगलाचार
संस्कृति सरोकार                                                  
तीज और त्योहार हैं – घर में बेटियाँ ।

सुशील, शांत, सहनशील
कर्मठ, सहज, सृजन-आधार,
विवेक, प्रज्ञा, दया, आदर
त्याग, बलिदान,पर्मार्थ-प्यार
निर्मल व्याहार
समग्र संस्कार हैं – घर में बेटियाँ ।

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