बेनाम सृजनधर्मी

परमार्थ

और पुरुषार्थ से परे

अकर्मण्य / विलासी

सयाने ध्वजधारी

पुजते रहे अनवरत,

पूजते रहे

अयाने परिश्रमी

भोगते रहे-

प्रताड़न – प्रारब्ध,

मगर

थामे रहे – धुरी धरती की

संजोते रहे संसाधन

निस्वार्थ/निर्बाध

बेनाम सृजनधर्मी ।

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