नयन तारा

आँख की पुतली
जब
जा लगी
कज़रारी आँखों से
तो
आँख का काजल
आँख में ही सालने लगा
और
घर की सारी आँखें
आँख की पुतली को
आँखों से ओझल होने पर
आँखें दिखाने लगीं
तथा
आँख तरेर कर कहा-
आँख की अंधी
क्यों ? हमारी आँखों की शर्म पर,
आँख गड़ाए बैठी है ।

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