जाना ही है

जाना ही है ?

तो

हे  आत्मीय / बटेऊ

जाओ

खुशी से, मनोयोग से

पर

इतना जरूर करना

कि जब भी

आए बहार उधर से

तेरी

मरमरी मुस्कराहट की

बयार लाए

तो

रेतीले समन्दर में

उदास पड़ी सीप को

सकुन आए

वो भी लहलहाए ।

 

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