कीट-पतंगे

अथ से अब तक
चाँद का उजास पाने
उड़ते हैं पतंगे
अथक / बेपरवाह
मगर-
बीच में ही
निगल जाता है
प्रपंची आलोक
अबाध-अनवरत ।

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