इंटरनेटीय प्रेम कविता !

वे फेसबुक पर मिले थे
कुछ दिन हाय हलो के बाद चैटरूम में
प्रेमिल प्रेमिल हुए
उन्होंने एक दुसरे को जल्दी ही यह बात
समझा दी क़ि सम्भोग से ही समाधि तक पंहुचा जा सकता है।
उन्होंने संबंधों की बात की
लेकिन शादी को पचड़ा ही मानते रहे प्रेमीजन
वआट्स अप पर वे खुले इतने खुले इतने खुले इतने खुले
क़ि एक दिन उन्हें एक दुसरे से
डर लगने लगा…एक उब उनके बीच जगह
बनाने लगी…
उन्हें लगा क़ि कोई उनके निजी जीवन में
ताक़ झाँक कर रहा है
उन्होंने एक दिन बिना माफ़ी मांगे एक दुसरे को
अन्फ्रेंड कर दिया
अब दोनों बेहद खुश थे और शांत भी…

इंटरनेट पर प्रेम का जीवन छोटा है
सर्वर डाउन होते ही प्रेम मर जाता है…
ज़रूरी हो जाती है
एक और फ्रेंड रिक्युस्ट।

कविता/अजामिल

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