कोई दाता कोई भिखारी

इक दिन बोले जनक से राम, पिता मै सबसे बड़ा भिखारी हुआ,

दाता हो गये तुम सबसे बड़े, मै सबसे बड़ा भिखारी हुआ |
               

                  (१)
पाला जिसको था नाजों से, कलियों की तरह फूलों की तऱह,
बचपन में झुलाया था जिसको, बाँहों ने तेरी फूलों की तरह,
तेरे बाग की वह नाजुक डाली, जिसे पाकर मै धनवान हुआ |

                  (2)
मेरी बहु ने कभी बरसों पहले, अंगना में तुम्हारे जन्म लिया |
थी अमानत, वो मेरे घर की, जिसे पाल के तुमने बड़ा किया |
वो अमानत अपनी लेने को, तेरे दर पे याचक खड़ा हुआ।

                (3)
तेरी व्याकुलता, मैं समझ रहा, तेरी बेटी मेरी बहु रानी है,
मेरी, मेरे घर को नहीं केवल, ये सबके दिलों की रानी है
यह अमूल्य हीरा मेरा हुआ, जिसने है मुझे मालामाल किया
इक दिन ............. ..

 

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