जिन्दगी उसकी है कटी पतंग

न हो जीवन में प्यार का रंग I
तो बन जाए जिन्दगी बेरंग I
सीखा जिसने प्यार का ढंग,
ज़माना तो है उसके ही संग II

लाती है प्यार की तरंग I
जिन्दगी में नयी उमंग I
फैले जब खुशबु प्यार की,
तो महकता है अंग अंग II

कुछ लोग होते हैं दबंग I
प्यार है जिनके लिए नंग I
बस खेल,प्यार जिनके लिए,
मानसिक तौर पर है अपंग II

देखे जिसने प्यार के नवरंग I
वही जीता है जीवन से, जंग I
प्यार तो खुद एक नशा है,
इसके आगे विफल हर भंग  II

जिसने डाली प्यार में अडंग I
जो हुआ है प्यार से तंग I
जीवन में नहीं प्यार जिसके,
जिन्दगी उसकी है कटी पतंग II

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गुरचरन मेह्ता 

One Response

  1. Muskaan 25/08/2013

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