ठोकर से जो गिरे

ठोकर से जो गिरे वो तो फिर से सँभल गये |
शराबखाने में शराबी अक्सर फिसल गये ||
क्या कहें हम इन मोहब्बत के पहरेदारों को ?
जो पहरा देते देते मोहब्बत ही निगल गये ||

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