कुन्डली

अन्ना ने जब से लिया, अनसन का आधार

राजनीत में चढ गया, ऐसा पारावार

ऐसा पारावार, नित नये हुए बखेङे

सबके अपने राग, गर्क जनता के बेङे

नीरज करो विचार, सेठ सब के सब धन्ना

लोकपाल की बात, लोकहित में हो अन्ना

 

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