जख्मे मोहब्बत ले के

 जख्मे मोहब्बत ले के निकला तेरी चौखट से 

अब तो हर चौखट हमे बिराने से लगते है
भुल जाता जब भुलने की नौबत आती हमे
आइना कहती है अभि भी तेरे दिवाने से लगते है
दिल से हटती नही तुँ नजरे तरसती है दिदार को
सपने आती है कम्बख्त जैसे बहलाने से लगते है
कलियाँ तो बहुत है इस गलीयों मे मेरे महबुब
जील्लते तेरी कर के मुझे बहकाने से लगते है
कई महफिलों की रौनके देखि इस अन्जान शहर मे
न हुवा कोइ तेरे दर जैसा ये टुटी मैखाने से लगते है
हरि पौडेल

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