करना पड़ेगा

हमें समझना चाहते हो तो हमारा विश्वास – करना पड़ेगा I
हमें परखना चाहते हो तो कुछ न कुछ ख़ास – करना पड़ेगा II

नहीं है किसी को इजाज़त दखलंदाजी की हमारी जिन्दगी में,
घुसना चाहते हो तोड़ दिल का दरवाज़ा तो दुस्साहस – करना पड़ेगा  I

जनता खामोश,सरकार मौन,पड़ोसी शैतान, अब क्या होगा,
अंजाम की चिंता छोड़ो जनाब फिलहाल तो आगाज़ – करना पड़ेगा  I

जो सारथी हो कृष्ण सा तो हम भी अर्जुन से कम नहीं,
सच का साथ देना है तो अपनों को नाराज़ – करना पड़ेगा  I

हमारी अकेली कोशिश से यह गूंगा शहर बोल तो नहीं सकता,
पर आवाज़ उठानी है तो खुलकर सभी को प्रयास – करना पड़ेगा  I

सहेजना चाहते हो दुखों को मुस्कान बना कर दिल में तो,
दूसरों की ख़ुशी का आभास ओर गम का एहसास – करना पड़ेगा  I

उन्हें शौंक है नफरत का और हमें मोहब्बत का, क्या करें,
हममें से तो किसी एक को अपनी भावना का त्याग – करना पड़ेगा  I

तुम करो सामना सच्चाई का या तोड़ दो फिर आईना,
जिन्दगी का ये इम्तहान तो हमें पास – करना पड़ेगा  I

न चलेगा काम अब चुप रहने से इस जंगल में “चरन”
मन को साफ़ कर खुद को ही अब बिंदास – करना पड़ेगा  II

_____________________________________

गुरचरन मेह्ता 

Leave a Reply