सुन नापाक पाक………..

बहनो का सिंदूर छीना है
माताओ का लाल
ऐ वैरी तू कायर बन
छिप छिप करता वार
लडना है तो
मैदानों में खुले आम आ कर के देख
चीर के रख देंगे
नक्शे से मिट जायेगा नाम

वीर शहीदों की विधवाओं के
आंसू में तू बह जायेगा
जिस माता का लाल मिटा
उसका श्राप तूझे खायेगा
छिप ले जितना छिपना तुझको
काल तेरा भी आयेगा
वीर नहीं है मरे वतन के
चाहे हो नेता गददार……..
-सत्येन्द्र कात्यायन

One Response

  1. यशोदा अग्रवाल 15/08/2013

Leave a Reply