अब समझ आया

मोहब्बत है जिन्दगी में सब कुछ मेरे हुजुर – अब समझ आया I
प्यार क्या होता है, हुए हैं वो हमसे ज़रा दूर – अब समझ आया II

तुम्हारी वफाओं का भरपूर फायदा उठाया हमने,
समझे, लाचारी क्या है जब हुए हम मजबूर – अब समझ आया I

प्यार के पल गंवा दिए हमने जाने क्यूँ,
गिरें ज़मीं पर, ओर उतरा सुरूर – अब समझ आया I

खंजर लिए देखा दोस्तों को तो याद आया,
क्यूँ कहते थे वो हो न जाना मशहूर – अब समझ आया I

पता चले जिन्दगी के मायने जिन्दगी के बाद,
कुछ उनका तो कुछ हमारा भी था कुसूर – अब समझ आया I

छुना चाहते थे आसमां, तोड़ना चाहते थे तारे,
पर क्या करते हम , खट्टे थे अंगूर – अब समझ आया I

जो बीत गए उन लम्हों की कसक तो याद रहेगी,
कहते थे एक दिन समझ में आयेगा जरुर – अब समझ आया I

बहाना बनाना, समय पर न आना, चुभन दे गया “चरन”
तुम तो थे मशरूफ, हम समझ बैठे मगरूर – अब समझ आया II

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गुरचरन मेह्ता 

3 Comments

  1. santosh Gulati 11/08/2013
    • Gurcharan Mehta 'RAJAT' Gurcharan Mehta 12/08/2013
  2. Muskaan 14/08/2013

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