कहीं पे चीख होगी और कहीं किलका SALIM RAZA REWA

GAZAL
कहीं पे चीख होगी और कहीं किलकारीयाँ होंगी
अगर हाकिम के आगे भूख और लाचारियाँ होंगी

अगर हर दिल में चाहत हो शराफ़त हो सदाक़त हो
मुहब्बत का चमन होगा ख़ुशी की क्यारियाँ होंगी

किसी को शौक़ यूँ होता नहीं ग़ुरबत में जीने का
यक़ीनन सामने उसके बड़ी दुश्वारियाँ होंगी

ये होली ईद कहती है भला कब अपने हांथों में
वफ़ा का रंग होगा प्यार की पिचकारियाँ होंगी

न छोड़ो ये समझ के आग अब ठंडी होगी
ये मुम्किन है दबी कुछ राख में चिंगारियाँ होंगी

मुक़ाबिल में है आया एक जुगनू आज सूरज के
यक़ीनन पास उसके भी बड़ी तैयारियाँ होंगी

सुख़नवर का ये आंगन है “रज़ा”शेरों की ख़ुश्बू है
ग़ज़ल और गीत नज़्मों की यहाँ फुलवारियाँ होंगी

shayar salimraza 9981728122

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