मेरा मज़हब यही सिखाता है – SALIM RAZA REWA

ग़ज़ल ..
मेरा मज़हब यही सिखाता है
सारी दुनिया से मेरा नाता है

ज़िन्दगी कम है बाँट ले खुशियाँ
दिल किसी का तू क्यूँ दुखाता है

हर भटकते हुए मुसाफ़िर को
राह सीधा वही दिखाता है

चह चहाते हुए परिन्दों को
कौन दाना यहाँ चुग़ाता है

दुश्मनों के तमाम चालों से
मेरा रहबर मुझे बचाता है

दोस्त उसको ही बस कहा जाए
मुश्किलों में जो काम आता है

दुश्मनों से “रज़ा “बड़ा है वो
रास्ते में जो छोड़ जाता है

gazal shayar SALIMRAZA REWA
9981728122
16.05.12

One Response

  1. gautam jain 11/08/2013

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