जो माने है रब का हर फ़रमान सदा- SALIM RAZA REWA

28.05.13 OPEN BOOK

!ग़ज़ल !
जो माने है रब का हर फ़रमान सदा
उसके लब पे रहती है मुस्कान सदा !

उनका घर तो रहमत से भर जाता है
जिनके घर में आते हैं मेहमान सदा !

टूटी शाखे क्या ग़म टूटे पत्तों का
गुलशन में तो आते हैं तूफ़ान सदा !

हक़ पे चलने वाले हक़ पे चलते हैं
माना की बहका ता है शैतान सदा !

क़तरे- क़तरे से इक सागर बनता है
फूलों से ही बनते हैं गुलदान सदा !

धीरे – धीरे शेर मेरे भी चमकेगें
पढ़ता हूँ मै ग़ालिब का दीवान सदा !

जो सब से मिल जुल कर हर दम रहता है
महफ़िल में वो ही पता सम्मान सदा !

9981728122 salim raza rewa

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