ग्रहावस्था के अन्य विचार

गर्वित दीप्त एक सम जानौ |गुरु के संग ग्रह मुदित बखानौ ||
राहु केतु युति होवै पंचम |सो जानहु ग्रह है लज्जित सम ||
शनि कुज सूर्य संग ग्रह आवा|सो ग्रह लज्जित संज्ञा पावा ||
पापी ग्रह दृष्टी जो पावै | सूर्य युती क्षोभित कहलावै ||

जो जल राशी बैठि ग्रह शत्रु युती ह्वै जाय |
शत्रु दृष्टि का पाइ के तृषित कहहीं कविराय ||

क्षोभित क्षुधित तृषित ग्रह पड़ें जो केंद्र त्रिकोण |
आत्म मान दांपत्य सुख का होता तोड़ मरोड़ ||

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