ओबामा के देश में मनाऊ सबकी खैर

ओबामा  के देश में मनाऊ  सबकी खैर ,

ना  काहू  से दोस्ती ना  काहू  से बैर .
आँगन-आँगन  दीवारे है छतों  का छूटा  संग ,

तारों में उलझी हुई है बच्चों की पतंग .
 दहशतगर्दो ने लिया फिर मासूमों की जान ,

साँप तो निकल गया,हम देखते रहे निशान .
चीखों से भरा हुआ है अस्पताल का वार्ड ,
वे मुआवजे  बाँट  रहे है ,देख के आई कार्ड .
गेहूं लाखों टन सडा ,वो हुआ बहुत हताश ,
एक किसान मेरे मुल्क का ढूंढ रहा सल्फास .

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