मेरे शहर में है एक अलसाया हुआ बाज़ार

मेरे शहर में है एक अलसाया हुआ बाज़ार ,
महंगाई की मार से मुरझाया हुआ बाज़ार ,

सड़कें बोलती है बहुत तो गलियां है खामोश ,
हादसे के गवाह सा पथराया हुआ बाज़ार ,

कोई जुलूस निकला है या है चक्का जाम,
लुट जाने के डर से घबराया हुआ बाज़ार ,

फुटपाथ छिप गए है भीड़ सडकों पर देख के
अपनी ही कैद में कसमसाया हुआ बाज़ार

अमन का जो मसीहा था वही निकला दुश्मन
अपाहिज सा लाचार तिलमिलाया हुआ बाज़ार

3 Comments

    • prem narain premnarain 23/08/2013
  1. शुभम् श्रीवास्तव 'ओम' शुभम् श्रीवास्तव 'ओम' 23/09/2013

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