कुछ शेर

शायरों की किस्मत तो खुदा आशुओं से लिखता है |
आंशुओ के सूखने पर कागज कोरा ही दिखता है ||

जालिमो के जलजले को न हम सर झुकाते है |
हम तो जालिमो की महफिल में जलजला दिखाते है ||

उनकी सुरीली आवाज का ये बन्दा है मोहताज नहीं |
रुक जाये मौत की महफ़िल में ऐसी भी मेरी आवाज नही ||

ग़ालिब हों या फिर हों अकबर हम सबके ही परदादा है |
कभी मिली मोहब्बत नहीं हमे पर गम तो सबसे ज्यादा है ||

मेरे इश्क के जश्न में गमो के साये हैं |
रोते इस लिए नहीं की आशूं भी पराये हैं ||

मजबूर आशिक तो गम को देखकर रोता है |
उसके हर ख़्वाब का हिसाब आशुओं से होता है ||

जिंदगी के हसीं सफ़र में खुद को न भूल जाना |
कल क्या होगा ये तो खुद खुदा ने नही जाना ||

आप ने खुद की मोहब्बत की खुद ही खुदकशी कर दी |
मेरी छोटी सी खता के लिए जिंदगी में बेबशी भर दी ||

किसी शायर की शायरी के लिए तुम बहुत बदनसीब हो |
शायर भी बेचारा क्या करे जो तुम्ही उसका नसीब हो ||

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