जिस्म में जान अभी बाकी है

जिस्म में जान अभी बाकी है ,
दिल में अरमान अभी बाकी है ,

हौंसलों को उड़ान भरने दो,
पूरा आसमान अभी बाकी है ,

थक हार के रस्ते में सो गया है जो ,
उसके होंठों पे मुस्कान अभी बाकी है ,

बाढ़ में बह गई झोपड़ी तो क्या हुआ,
पेड़ों पे मचान अभी बाकी है ,

सूखी नदी की तलहटी में रेत के नीचे,
पानी का निशान अभी बाकी है ,

ज़िन्दगी ज़द्दोज़हद का नाम है यारों,
आखिरी इम्तिहान अभी बाकी है .

 

2 Comments

  1. शुभम् श्रीवास्तव 'ओम' शुभम् श्रीवास्तव 'ओम' 05/08/2013
  2. prem narain premnarain 23/08/2013

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