नैसर्गिक और तात्कालिक मैत्री से पंचधा मैत्री विचार

जो नैसर्गिक अरु तात्कालिक | मित्र होई अधिमित्र प्रमाणिक ||
नैसर्गिक सम तात्कालिक मित्रा | जानौ  ते  है  मित्र  विचित्रा ||
नैसर्गिक रिपु तात्कालिक प्रीती |तिनकी संज्ञा  सम परतीती ||
उभय  शत्रु  होवै  जो  खेटा  | अधीशत्रु  कर   बनै    लपेटा    ||
नैसर्गिक सम तात्कालिक वैरी |तिनकी संज्ञा शत्रु  ही ठहरीं  ||
जो तात्कालिक शत्रुता ,नैसर्गिक मित्र प्रमान |
तिनकी संज्ञा सम कहहुं ,सारावली विधान    ||

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